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Tags : Prem Kumar Pandey#

ढेला और पत्ता

ढेला और पत्ता :वर्तमान स्थिति में यह अतीत की कहानी लगेगी परंतु हम जैसे सीनियर सिटीजन को पुराने जमाने की याद आ जायेगी।  डॉ प्रेमकुमार पांडेय जी की पोस्ट अम्मा पढ़ी-लिखी नहीं थीं। सामान्यत: ग्रामीण परिवेश की महिलाओं में किस्सा-कहानी कहने की अद्भुत क्षमता होती है। लेकिन मेरी माँ इस कला से अछूती थीं। हम […]Read More